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अधूरी स्क्रिप्ट के साथ Kubbra Sait का दमदार रोल, Sankalp में कैसा रहा नाना पाटेकर के साथ काम करने का एक्सपीरियंस

प्रकाश झा के शो ‘संकल्प’ में कुब्रा सैत का रोल अचानक छोटा कैमियो से बड़ा किरदार बन गया. नाना पाटेकर के साथ काम करते हुए उन्होंने कई अहम सीखें हासिल कीं और सेट का माहौल परिवार जैसा बताया.

Kubbra Sait Share Experience with Nana Patekar
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Kubbra Sait Share Experience with Nana Patekar
( Image Source:  Instagram: kubbrasait )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 6 April 2026 9:14 AM

प्रकाश झा के नए वेब शो 'संकल्प' में एक्ट्रेस कुब्रा सेठ (Kubbra Sait) अपनी शानदार एक्टिंग के लिए लोगों की तारीफें बटोर रही हैं. इस शो में उन्होंने डीसीपी परवीन शेख का किरदार निभाया है. परवीन शेख एक सच्ची और डेडिकेटेड पुलिस ऑफिसर हैं, जो अपने काम के प्रति बहुत लॉयल हैं और दोस्ती को बेहद अहम मानती हैं. हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कुब्रा सैत ने खुलकर अपनी बातें शेयर कीं. उन्होंने बताया कि कैसे निर्देशक प्रकाश झा ने सिर्फ एक बार उनसे मिलने के बाद ही उनकी भूमिका को छोटी कैमियो रोल से बढ़ाकर काफी बड़ी भूमिका बना दिया. साथ ही उन्होंने दिग्गज स्टार नाना पाटेकर के साथ काम करने का अपना एक्सपीरियंस भी शेयर किया.

कुब्रा बताती हैं कि जब उन्हें इस शो के लिए कॉल आया तो उनका पहला रिएक्शन यह था कि शायद यह कोई मजाक है. वह कहती हैं, 'मैं बहुत खुश थी, लेकिन शुरू में मुझे यकीन ही नहीं हुआ. मैं सोच रही थी कि यह प्रकाश झा का ऑफिस है, इतने बड़े निर्देशक मुझे काम दे रहे हैं? सच में लगा कि कोई मज़ाक हो रहा है.' फोन पर टीम से बात करने के बाद वे प्रकाश झा से व्यक्तिगत रूप से मिलीं. कुब्रा कहती हैं, 'बाबा (प्रकाश झा) से मिलना बहुत ही अच्छा और शांत अनुभव था. वे बेहद अच्छे इंसान हैं. उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा.'

छोटी भूमिका से बड़ी भूमिका तक का सफर

सबसे दिलचस्प बात यह है कि कुब्रा ने शुरू में सिर्फ एक छोटी सी भूमिका करने के लिए हां कहा था. लेकिन जल्दी ही सब कुछ बदल गया. उन्होंने बताया, 'मुझे नहीं पता प्रकाश झा क्या सोच रहे थे, लेकिन यह फैसला मेरे लिए बहुत शानदार साबित हुआ. जब मुझे पता चला कि मेरी भूमिका खास है, तब भी मुझे इसमें कोई झिझक नहीं हुई. फिर वे मुझसे मिले और बोले, 'तू जा, मैं लिखता हूं'.' कुब्रा को अपनी भूमिका का यह नेचुरल ग्रोथ बहुत पसंद आया. वे कहती हैं, 'मैं इससे ज्यादा या कुछ और नहीं मांग सकती थी. सब कुछ बिल्कुल सही समय पर और सही तरीके से हुआ.'

स्क्रिप्ट भी पूरी नहीं दी गई

कुब्रा के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उन्हें पूरी स्क्रिप्ट नहीं दी गई थी. वे याद करते हुए कहती हैं, 'उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट का बाकी हिस्सा भी नहीं दिया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि 'तू मर जाती है, तुझे क्या जानना है'.' जब शो रिलीज हुआ और कुब्रा ने पूरा शो देखा, तब उन्हें अपनी भूमिका की असली अहमियत का पता चला. वे हैरान होते हुए हंसकर कहती हैं, 'मुझे एहसास हुआ कि कहानी में मेरी भूमिका बहुत बड़ी है. मेरी मौत के बाद ही असली मुश्किलें और समस्याएं शुरू होती हैं. दरअसल, मैं ही कहानी की मुख्य समस्या थी. यह जानकर मैं हैरान रह गई.'

नाना पाटेकर से मिली सीख

नाना पाटेकर के साथ काम करना कुब्रा के लिए एक बहुत बड़ा और सीख भरा अनुभव रहा. वे कहती हैं, 'उनकी सबसे खास बात है उनकी सहजता. वे बहुत मिलनसार, प्यार करने वाले और बेहद आत्मविश्वासी हैं.' कुब्रा उनकी विनम्रता और प्रोफेशनल तरीके की भी तारीफ करती हैं.' इतने सालों के अनुभव के बाद भी वे इतने विनम्र और सटीक तरीके से काम करते हैं. शायद यही उनकी सफलता का राज है. उनके साथ काम करके मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला.'

सेट का माहौल था परिवार जैसा

कुब्रा ने शो के सेट का माहौल बहुत ही पॉजिटिव और खुशनुमा बताया. वे कहती हैं, 'वहां का माहौल बहुत अच्छा था. इसका पूरा क्रेडिट प्रकाश झा को जाता है. वे पुराने जमाने के सोच वाले निर्देशक हैं, जो पूरी टीम को साथ लेकर चलते हैं.' वे प्रकाश झा और नाना पाटेकर की पुरानी दोस्ती को याद करते हुए कहती हैं, 'दोनों सालों से अच्छे दोस्त हैं. उन्हें सेट पर बच्चों की तरह मज़ाक करते और कहानियां सुनाते देखना बहुत मजेदार लगता था. हम सब सेट पर ही रहते थे, साथ में खाना खाते थे और पैकअप के बाद स्क्रिप्ट पर चर्चा करते थे. पूरा माहौल सचमुच एक परिवार जैसा था और वह भी बिल्कुल सच्चा और बनावटी नहीं.' एक खास मजेदार बात यह भी थी कि जब नानी (नाना पाटेकर की पत्नी) खाना बनाती थीं तो पूरा स्टाफ मिलकर खाता था. कुब्रा कहती हैं, 'खाना बहुत टेस्टी होता था. इस सेट का हिस्सा बनना मेरे लिए सचमुच बहुत सुखद और यादगार एक्सपीरियंस रहा.'

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