Pakistan से Bangladesh और Srilanka तक- क्या ईंधन संकट ने पड़ोसी देशों की हालत कर दी बेहाल?
ईरान, अमेरिका और इजराइल की जंग की वजह से पूरी दुनिया ईंधन के संकट से परेशान है. भारत के पड़ोसी देशों की हालत भी गंभीर है. इनमें से कई ने पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम कर दिया है और कई ने वर्किंग डेज़ घटा दिए हैं.
Energy Crisis in Neighbours Country: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई रुकावट के बीच दक्षिण एशिया के कई पड़ोसी देश गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं. Sri Lanka, Pakistan, Bangladesh और Nepal जैसे देशों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कई देशों ने ईंधन और ऊर्जा की खपत कम करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की नाकेबंदी का असर India पर भी पड़ा है. केंद्र सरकार ने बताया है कि पड़ोसी देशों की ओर से ऊर्जा सहायता के लिए अनुरोध मिले हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि बांग्लादेश समेत कुछ देशों ने डीजल जैसे ऊर्जा उत्पादों के निर्यात की मांग की है. उन्होंने बताया कि किसी भी फैसले से पहले देश में उपलब्धता और उत्पादन का आकलन किया जाएगा.
पाकिस्तान का क्या है हाल?
पाकिस्तान की बात करें तो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बावजूद वहां ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई. पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik ने पेट्रोल की कीमत 137.24 पाकिस्तानी रुपये बढ़ाकर 458.4 रुपये प्रति लीटर कर दी, जो लगभग 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इस्लामाबाद अपनी लगभग 80 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत United Arab Emirates और Oman से पूरी करता है, जहां इस समय तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं.
हालांकि, देशभर में विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने पेट्रोल की कीमत में 80 रुपये की कटौती की घोषणा की, जिससे यह 378 रुपये प्रति लीटर हो गई. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की नाकेबंदी के प्रभाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सरकारी दफ्तरों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया है, स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी हैं और ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं. इसके अलावा, सरकार ने अगले 30 दिनों तक मुफ्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट की भी घोषणा की है.
बांग्लादेश के क्या हैं हालात?
बांग्लादेश की स्थिति भी काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह अपनी 95 प्रतिशत तेल और गैस की जरूरत पश्चिम एशिया से पूरी करता है. अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते ढाका ने ऊर्जा खपत पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं. देश में ऑफिस और दुकानों के समय को कम कर दिया गया है और शादियों में सजावटी लाइटिंग पर अगली सूचना तक रोक लगा दी गई है.
अब बांग्लादेश में सरकारी और निजी दफ्तर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ही खुलेंगे, जबकि बैंक सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक काम करेंगे. शॉपिंग सेंटर को शाम 6 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया है, हालांकि खाने-पीने की दुकानों को सामान्य समय तक खुला रखने की अनुमति है. इसके अलावा, सरकारी विभागों को नए वाहन और कंप्यूटर खरीदने से भी मना किया गया है. ढाका ने ईंधन खरीद पर सीमा तय की है और उर्वरक फैक्ट्रियों में उत्पादन भी रोक दिया है.
श्रीलंका के क्या हैं हालात?
श्रीलंका भी इस संकट से जूझ रहा है और 2022 जैसी आर्थिक स्थिति से बचने की कोशिश कर रहा है. कोलंबो को भारत से करीब 38,000 टन ईंधन की मदद मिली है. राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने ईंधन की राशनिंग लागू की है, इसकी कीमत में एक तिहाई तक बढ़ोतरी की है और बिजली दरों में 40 प्रतिशत तक इजाफा किया है.
ऊर्जा संकट को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने स्ट्रीट लाइट, नीयॉन साइन और बिलबोर्ड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. साथ ही सरकारी संस्थानों से एयर कंडीशनर का कम उपयोग करने को कहा गया है, वर्क फ्रॉम होम को फिर से लागू किया गया है और चार दिन का कार्य सप्ताह भी शुरू किया गया है.
नेपाल की क्या कंडीशन है?
नेपाल, जो एक स्थल-रुद्ध (लैंडलॉक्ड) देश है, उसने भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अपने कार्य सप्ताह को छह दिन से घटाकर पांच दिन कर दिया है. अब वहां शनिवार के साथ एक और दिन की छुट्टी दी जा रही है. सरकार के प्रवक्ता Sasmit Pokharel ने कहा कि ईंधन आपूर्ति में आई समस्या के कारण यह फैसला लिया गया है.
अब नेपाल में सरकारी दफ्तर सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक काम करेंगे. इसके साथ ही सरकार पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के उपायों की भी समीक्षा कर रही है. संकट और घबराहट में बढ़ती खरीदारी के बीच नेपाल ने पिछले महीने आधे भरे गैस सिलेंडर बेचना भी शुरू कर दिया है.




