Begin typing your search...

क्या है कनाडा में आ रहा C-9 बिल, जिससे भड़के खालिस्तानी, हिंदू मंदिरों को करने लगे टारगेट

कनाडा में प्रस्तावित C-9 बिल को लेकर खालिस्तानी समर्थकों में नाराज़गी बढ़ती दिख रही है. यह बिल मुख्य रूप से नफरत फैलाने वाली गतिविधियों, हिंसा भड़काने वाले संगठनों और विदेशी फंडिंग की निगरानी को सख्त करने से जुड़ा बताया जा रहा है.

क्या है कनाडा में आ रहा C-9 बिल, जिससे भड़के खालिस्तानी, हिंदू मंदिरों को करने लगे टारगेट
X
( Image Source:  @WaliRuchi-X )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Published on: 6 April 2026 8:21 PM

कनाडा में हाल ही में पेश किए गए C-9 बिल को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. इस बिल के खिलाफ खालिस्तानी समर्थकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है. रविवार (5 अप्रैल) को कनाडा के ब्रैम्पटन और सभी शहरों में हिंदू मंदिरों के बाहर प्रदर्शन किया गया है जिसके बाद माहौल और गरमा गया है.

बताया जा रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन उस समय हुआ, जब कनाडा की संसद ने नफरत फैलाने वाली गतिविधियों और धार्मिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन पर रोक लगाने वाले सख्त कानून C-9 को पास किया. इस कदम को हिंदू संगठनों ने सुरक्षा की दिशा में अहम बताया, जबकि खालिस्तानी समूहों के लोग इसे अपने खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं इस पर जमकर बवाल कर रहे हैं आइए जानते हैं C-9 बिल क्या है और इसका क्यों हो रहा है विरोध?

क्या है C-9 बिल और क्यों हो रहा है विरोध?

C-9 बिल एक सख्त कानून है, जिसे कनाडाई हाउस ऑफ कॉमन्स ने 25 मार्च को पास किया. इस कानून का मकसद धार्मिक स्थलों के बाहर विरोध प्रदर्शन, डराने-धमकाने और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है. इस बिल के तहत अब किसी भी धार्मिक स्थल के पास जाकर लोगों को डराना, रास्ता रोकना या नफरत भरे प्रतीकों का इस्तेमाल करना अपराध माना जाएगा. खासतौर पर यह कानून उन गतिविधियों को रोकने के लिए लाया गया है, जिनमें खालिस्तानी समर्थक मंदिरों के बाहर प्रदर्शन करते रहे हैं.

आखिर क्यों हो रहा है इस बिल का विरोध?

बात कर इस बिल पर हो रहे प्रदर्शन की तो सिख्स फॉर जस्टिस नामक संगठन ने किया, जिसे भारत पहले ही आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है. इस संगठन ने ब्रैम्पटन के त्रिवेणी मंदिर और सरे के लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर खालिस्तानी जिंदाबाद रैलियां आय़ोजित की और साथ ही सोशल मीडिया पर इसे हिंदू सगंठन के खिलाफ प्रतिरोध बताया.

क्या मंदिरों के बाहर हुआ हंगामा?

ब्रैम्पटन में चिंगुआकौसी रोड पर दर्जनों प्रदर्शनकारी 'खालिस्तान' के झंडे लेकर जमा हुए. वहीं दूसरी ओर मंदिर में श्रद्धालु पूजा के लिए आते-जाते रहे, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब प्रदर्शनकारी जोर-जोर से नारे लगा रहे थे, तो मंदिर प्रशासन ने लाउडस्पीकर पर संगीत बजाकर उन नारों की आवाज को दबाने की कोशिश की.

क्या पुलिस ने संभाला मोर्चा?

सरे में पुलिस ने पहले ही सतर्कता दिखाते हुए मंदिर के आसपास 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए कोर्ट से आदेश लिया था. रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस और स्थानीय पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया. एक वीडियो में पुलिस अधिकारी को प्रदर्शनकारी से कहते हुए देखा गया- क्या आप जा रहे हैं?" जिसके बाद वह तुरंत वहां से हट गया.

भारत-कनाडा संबंधों से क्या है कनेक्शन?

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और कनाडा के बीच रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं. पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर लगाए गए आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी. हालांकि बाद में कनाडा की जांच एजेंसियों ने इन आरोपों से दूरी बनाई.

क्या कहते हैं हिंदू संगठन?

हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन और अन्य संगठनों ने इस बिल का स्वागत किया है. उनका कहना है कि 'मंदिर शांति, प्रार्थना, आत्मचिंतन और कल्याण के लिए होते हैं, न कि राजनीतिक डर या दबाव का केंद्र बनने के लिए. उन्होंने पुलिस से मांग की है कि मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. बताया जाता है कि इससे पहले भी खालिस्तानी समर्थकों द्वारा मंदिरों के बाहर हिंसक प्रदर्शन किए गए हैं. कई बार श्रद्धालुओं के साथ मारपीट और झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं.

क्या है आगे का असर?

C-9 बिल अब कनाडा की सीनेट में जाएगा और वहां से पास होने के बाद कानून बन जाएगा. अगर यह लागू होता है, तो धार्मिक स्थलों के बाहर इस तरह के प्रदर्शन पर सख्ती से रोक लगेगी.

अगला लेख