Nora Fatehi को है Daddy Issues, आखिर यह क्या होता है, कैसे यह बनते हैं लाइफ की सबसे बड़ी परेशानी?
नोरा फतेही ने बताया कि उन्हें Daddy Issues हैं. दरअसल, यह कोई मेडिकल टर्म नहीं है, बल्कि एक ऐसी कंडीशन को दिखात है, जहां बचपन में पिता के साथ रिश्ते की कमी या जटिलता बड़े होकर इंसान के बिहेवियर, कॉन्फिडेंस और रिलेशनशिप्स पर असर डालती है.
नोरा फतेही को है डैडी इश्यू
हाल ही में नोरा फतेही ने लिली सिंह के पॉडकास्ट में बताया कि उन्हें 'डैडी इश्यू' हैं. नोरा ने बताया कि उनके माता-पिता के अलग होने के बाद उनके पिता लंबे समय तक उनकी जिंदगी से दूर रहे, जबकि उनकी मां ने अकेले ही दोनों बच्चों की परवरिश की. इस एक्सपीरियंस ने उन्हें आज तक
आज के समय में डैडी इश्यू शब्द अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन बहुत कम लोग इसका सही मतलब समझते हैं. यह कोई मेंटल बीमारी नहीं है, बल्कि बचपन में पिता के साथ रिश्ते में आई कमी या कॉम्प्लेक्सिटी का असर है, जो बड़े होकर हमारी सोच, इमोशन्स और रिश्तों को खराब कर सकता है.
क्या होता है ‘डैडी इश्यू’?
डैडी इश्यू एक ऐसा इनफटर्मल शब्द है, जिसका इस्तेमाल उन इमोशनल और मेंटल समस्याओं के लिए किया जाता है, जो बचपन में पिता से कम प्यार, सेफ्टी या सपोर्ट न मिलने की वजह से पैदा होती हैं. इस कॉन्सेप्ट की जड़ें मनोवैज्ञानिक Sigmund Freud के फादर कॉम्प्लेक्स से जुड़ी मानी जाती हैं. हालांकि आज के समय में यह शब्द आम बोलचाल में ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन एक्सपर्ट इसे एक इमोशनल पैटर्न के रूप में देखते हैं, जो किसी भी जेंडर पर असर डाल सकता है.
क्या हो सकते हैं कारण?
डैडी इश्यू आमतौर पर बचपन के अनुभवों से जुड़े होते हैं. कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- अगर पिता फिजिकली या इमोशनली मौजूद नहीं थे, तो बच्चे के अंदर खालीपन और असुरक्षा की भावना विकसित हो सकती है.
- अगर पिता का बिहेवियर गुस्सैल, कंट्रोलिंग या हिंसक था, तो यह बच्चे के मेंटल हेल्थ पर गहरा असर डाल सकता है.
- कई बार पिता घर में होते हैं, लेकिन इमोशनली जुड़े नहीं होते हैं. इससे बच्चे को प्यार और एक्सेप्टेबिलिटी की कमी महसूस होती है.
- प्यार, सुरक्षा और सराहना जैसी भावनात्मक जरूरतें पूरी न होने पर वही कमी बड़े होकर रिश्तों में दिखाई देती है.
क्या हैं इसके साइन्स?
हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ आम संकेत इस तरह हैं:
- ऐसे लोग अपने पार्टनर को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं और हर समय एश्योरेंस चाहते हैं.
- दूसरों पर भरोसा करने में दिक्कत होती है, खासकर पुरुषों पर.
- कुछ लोग बार-बार ऐसे रिश्तों में पड़ते हैं जो टॉक्सिक या अब्यूसिव होते हैं.
- ऐसे लोग अकेलेपन से डरते हैं और किसी भी रिश्ते में बने रहने की कोशिश करते हैं, चाहे वह हेल्दी हो या नहीं.
- कई मामलों में व्यक्ति ऐसे पार्टनर की तलाश करता है जो उसे सुरक्षा और गाइडेंस दे सके. यानी उनका बड़े उम्र के पार्टनर की ओर ज्यादा अट्रैक्शन होता है.
- प्यार और वैलिडेशन की कमी के कारण व्यक्ति लगातार और जरूरत से ज्यादा ध्यान और प्यार चाहता है.
रिश्तों पर कैसे पड़ता है असर?
डैडी इश्यू का सीधा असर व्यक्ति के रोमांटिक रिश्तों पर पड़ता है.
- कुछ लोग बहुत जल्दी इमोशनली अटैच हो जाते हैं.
- कुछ कमिटमेंट से डरते हैं.
- कुछ बार-बार टॉक्सिक रिश्तों में फंस जाते हैं.
- यह पैटर्न अक्सर अनजाने में होता है, क्योंकि व्यक्ति अपने बचपन के अनुभवों को दोहराने की कोशिश करता है.
क्या सिर्फ महिलाएं होती हैं डैडी इश्यू का शिकार?
नहीं, यह एक बड़ा मिथक है. डैडी इश्यू शब्द अक्सर महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह किसी भी जेंडर के व्यक्ति को हो सकता है. जिस किसी का अपने पिता या पिता जैसे व्यक्ति के साथ रिश्ता जटिल रहा है, वह इस तरह की भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर सकता है.
इससे कैसे निपटें?
- किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना सबसे अच्छा तरीका है. इससे आप अपनी भावनाओं और पैटर्न को समझ पाते हैं. यानी आपको थेरपी लेनी चाहिए.
- जर्नलिंग या खुद से सवाल पूछना जैसे मैं ऐसा क्यों महसूस करती हूं?. आपको अपने बिहेवियर की जड़ तक पहुंचने में मदद करता है.
- सीमाएं तय करना और सही कम्युनिकेशन सीखना जरूरी है.
- दोस्त, परिवार या सपोर्ट ग्रुप ये सभी आपको इमोशनल बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं.
- खुद को महत्व देना और अपनी जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है. इससे आप दूसरों पर भावनात्मक रूप से निर्भर नहीं रहते.
नोरा फतेही का डैडी इश्यू वाला बयान इस बात की याद दिलाता है कि बचपन के रिश्ते हमारे भविष्य को गहराई से प्रभावित करते हैं. हालांकि यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है. सही समझ, जागरूकता और मदद से इन इमोशनल पैटर्न्स को बदला जा सकता है.




