जांबाज SDPO से ‘भ्रष्टाचार के सरगना’ तक : कौन है गौतम कुमार? क्या है वर्दी के पीछे छिपी दौलत और विवादों की पूरी फाइल
किशनगंज के पूर्व SDPO गौतम कुमार का मामला सुर्खियों में है. जांबाज अफसर से भ्रष्टाचार के आरोपों तक उनकी कहानी में 80 करोड़ की संपत्ति, बेनामी प्लॉट और छापेमारी के खुलासे शामिल हैं. जानिए पूरा विवाद और प्रोफाइल.
किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ (SDPO) गौतम कुमार ने वर्दी का रौब, कानून का पहरेदार और जिम्मेदारी की शपथ ली थी, लेकिन कहानी जब पलटी तो वही अधिकारी भ्रष्टाचार का चेहरा खौफनाक चेहरा बनकर सामने आया. गौतम कुमार पर लगे आरोप सिर्फ एक अफसर पर सवाल नहीं उठाते, बल्कि पूरे सिस्टम की साख को कटघरे में खड़ा करते हैं. जिनके कंधों पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, उन्हीं पर अकूत संपत्ति जोड़ने, रिश्तों के नाम पर जमीन छिपाने और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं. छापेमारी, गिरफ्तारी और खुलासों की इस कहानी ने साफ कर दिया है कि सत्ता और वर्दी का गठजोड़ जब बिगड़ता है, तो भरोसा सबसे पहले टूटता है. जानिए कौन हैं गौतम कुमार और क्या हैं उनके कारनामे.
SDPO गौतम कुमार कौन?
एसडीपीओ गौतम कुमार (Gautam Kumar) बिहार के किशनगंज में तैनात रहे पुलिस अधिकारी हैं, जो हाल ही में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद सुर्खियों में आए. गिरफ्तारी के समय वह एसडीपीओ (Sub-Divisional Police Officer) के पद पर कार्यरत थे, लेकिन मामला उजागर होते ही उन्हें निलंबित कर दिया गया. कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी रखने वाले इस अधिकारी पर ही नियमों के दुरुपयोग के आरोप लगे, जिसके बाद बिहार की आर्थिक अपराध शाखा (EOU) ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
गौतम कुमार का पुलिस करियर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है. उन्होंने 1994 में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा शुरू की और धीरे-धीरे कई अहम पदों पर काम किया. 2004 से 2009 के बीच उन्होंने विभिन्न थानों का नेतृत्व किया और पूर्णिया जिले में मरंगा ओपी प्रभारी, डगरूआ थानाध्यक्ष और सहायक खजांची थानाध्यक्ष जैसे पदों पर रहे.
उनकी पहचान कभी एक जांबाज अधिकारी के रूप में भी रही है. साल 2005 के चर्चित मुदित अपहरण कांड में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी, जहां उन्होंने टीम का नेतृत्व करते हुए अपहृत बच्चे की सुरक्षित बरामदगी में योगदान दिया. इस दौरान मुठभेड़ में उनकी बहादुरी के लिए उन्हें गैलेंट्री अवॉर्ड मिला और बाद में प्रमोशन भी दिया गया. निजी जीवन में गौतम कुमार की पत्नी रूबी कुमारी एक शिक्षिका हैं और उनके तीन बेटे हैं.
गौतम कुमार का मामला क्या?
Gautam Kumar पर लगा मामला बिहार पुलिस में भ्रष्टाचार के नायाब उदाहरण के रूप में सामने आया है. आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित की. इस पूरे मामले की जांच बिहार की Economic Offences Unit (EOU) ने की, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हुई.
जांच के दौरान EOU की टीम ने गौतम कुमार के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति के सबूत मिले. आरोप है कि उन्होंने अपने नाम के अलावा पत्नी, गर्लफ्रेंड और घरेलू सहायिका (नौकरानी) के नाम पर भी जमीन और प्लॉट खरीदे, ताकि संपत्ति को छिपाया जा सके. शुरुआती जांच में 80 करोड़ की संपत्ति, 25 से ज्यादा प्लॉल, कई फ्लैट्स, महंगी संपत्तियां और नकदी के सुराग मिलने की बात सामने आई है.
बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी के नाम पर भी संपत्ति और कीमती गाड़ियां दर्ज हैं. गौतम कुमार ने गर्लफ्रेंड को 35 लाख की थाड गाड़ी भी दे रखी थी. जबकि कुछ निवेश ऐसे लोगों के नाम पर किए गए, जिनका उनकी आय से सीधा संबंध नहीं था. जांच एजेंसियों को शक है कि यह संपत्ति अवैध कमाई से जुटाई गई है.
इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे में भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जिस अधिकारी पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी थी, उसी पर नियमों को तोड़ने का आरोप लगा है. फिलहाल गौतम कुमार को गिरफ्तार करने के बाद सेवा से सस्पेंड कर दिया गया है. ईओयू इस मामले की गंभीरता से जांच में जुटी है.
क्या बेनामी संपत्ति का सरगना है?
वर्दीधारी और सस्पेंडेड एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ कार्रवाई के बाद से कई सवाल जांच अधिकारी के सामने उठ खड़े हुए हैं. अहम सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार के इस सरगना के पास बेनामी संपत्ति का साम्राज्य है. EOU ने जांच ने इस शक को और गहरा कर दिया है. फिलहाल, जांच अधिकारी छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजो और वित्तीय रिकॉर्ड की पुष्टि करने में जुटे हैं.




